आज के परिवेश में कैसा है गुरु शिष्य सम्बन्ध

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अखण्डमण्डलाकारं व्याप्तं येन चराचरम् ।

तत्पदं दर्शितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥

अर्थात उस महान गुरु को अभिवादन, जिसने उस अवस्था का साक्षात्कार करना संभव किया जो पूरे ब्रम्हांड में व्याप्त है, सभी जीवित और मृत में. गुरु एक ऐसा शब्द है जिसमे संसार का सारा ज्ञान समाहित है. गुरु बिना ज्ञान सम्भव नहीं और बिना इनके साथ के मनुष्य जी तो सकता है परन्तु ज्ञान के सागर को पा नहीं सकता.  आज के वक्त में जो व्यक्ति सफल है वही समय के साथ है. किन्तु ज्ञान का सागर पाए बिना अपनी सफलता पर पूर्ण विराम लगाना भी मुमकिन नहीं.

गुरु और शिष्य का रिश्ता तो प्राचीन समय से चला आ रहा है. पुराणों में हो या महाकाव्यों में सभी में गुरु शिष्य संबंधों का वर्णन है. चाहे वो राम और उनके गुरु वशिष्ठ हो, या कृष्ण और सान्दीपन , या अर्जुन व द्रोणाचार्य का रिश्ता या फिर एकलव्य और गुरु द्रोण का रिश्ता.

गुरु और शिष्य के बीच इस ख़ास रिश्ते के विषय में आज की पीढ़ी के विचार जानने के लिए आज शिक्षक दिवस के इस शुभ अवसर पर हमने कई विद्यालयों के छात्रों से बात की. हमने बच्चों से शिक्षक दिवस और शिक्षकों से

जुड़े कुछ सवाल पूछे,  जैसे-

आज गुरु और शिष्य के रिश्तों में निकटता के साथ साथ दूरी भी नज़र आने लगी है. आखिर क्या कारण है गुरु और शिष्य के रिश्ते में आये इस परिवर्तन का. इसी विषय पर कुछ सवालों को ले कर हमने सरदारनी सदा कौर खालसा गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल, दरियागंज की अध्यापिकाओं व बच्चों से भी बात की.

इस विद्यालय के शिक्षक और बच्चों के बीच बहुत ही प्यार भरा गहरा रिश्ता नज़र आया . आँचल जैन, ज़ैनब, नबीला, खदीजा, तरूबा, अमनप्रीत आदि बहुत से बच्चों से जब पसंदीदा शिक्षक या शिक्षिका के विषय में पूछा गया, सभी की आवाज़ बुलंदियों पर थी, किसी ने कहा हमारी प्रिंसिपल मैडम हरीतिमा मैडम, किसी ने कहा रूबी मैडम, कहीं से आवाज़ आयी अंजुला मैडम, अरविन्द मैडम, सतिंदर मैडम, प्रेम सर, एम एन शर्मा सर. शिक्षक दिवस के इस अवसर पर बच्चों व अध्यापक अध्यापिकाओं सभी का उत्साह देखते ही बनता था.

इस विद्यालय में शिक्षक दिवस मनाने का अंदाज़ ही अलग है यहां सेशन की शुरुआत होते ही १२वी कक्षा के विद्यार्थियों की स्कूल पार्लियामेंट बनती है, इसकी प्रेजिडेंट शिक्षक दिवस वाले दिन प्रिंसिपल के पद को संभालती है, और वाईस प्रेजिडेंट वाईस प्रिंसिपल के पद को. प्रिंसिपल तथा वाईस प्रिंसिपल खुद एक दिन के लिए उन्हें अपने पद पर स्थापित करती.

यहां की प्रिंसिपल हरीतिमा, जो हृदय से एक कवयित्री भी हैं. इनकी कविताओं की किताब भी प्रकाशित हो चुकी है. मैडम  ने हमे बताया, “इससे बच्चों को एक दिन के लिए ही सही पर शिक्षकों की ज़िम्मेदारियों का एहसास होता है”. हमने यहां के शिक्षकों के साथ सवाल जवाब का दौर शुरू किया जिसका जवाब कई शिक्षकों ने मुस्कराहट और गंभीरता के साथ दिए. ये शिक्षक थे यहां की प्रिंसिपल हरीतिमा, 12वी को पंजाबी  पढाने वाली अध्यापिका रूबी, गृह विज्ञान की अध्यापिका श्रीमती अंजुला पूरी, स्पोर्ट्स की अध्यापिका रजनी, 12वी के इतिहास के अध्यापक प्रेम शंकर मिश्रा, अध्यापक एम एन सिंह.

इस तरह सभी शिक्षकों के अपने अपने मत व विचार हैं परन्तु एक बात है जिस पर सभी शिक्षकों की एक राय थी और वो है आज शिक्षक और विद्यार्थियों के बीच होने वाली दूरी जिसका कारण वो आने वाली पीढ़ी के शिक्षक व विद्यार्धी दोनों को ही समझते हैं. और इन सभी का यही कहना है की अगर इस दूरी को ख़त्म करना है तो इसके लिए शिक्षक और विद्यार्थी दोनों को एक साथ मिल कर ही प्रयास करना पड़ेगा.

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