भाई के माथे पर तिलक कर बहनें मांगती है भगवान यम से उसकी लंबी उम्र

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भाई बहन का अटूट रिश्ता भाई दूज, जिसमें बहन अपने भाई की रक्षा के लिए भगवान यम की पूजा करती है,जिससे उसके भाई की आयु लंबी हो।भारतीय संस्कृति की ख़ासियत यही है कि यहां हर त्योहार की एक अलग मान्यता है।जिसमें कभी कभी बहन भाई की रक्षा का वचन देता है तो कभी बहन अपने वार की रक्षा के लिए पूजा करती है। इसे भी पढ़ेः मिशन सेवा फ़ाउन्डेशन द्वारा निशुल्क सिलाई प्रशिक्षण केन्द्र की शुरुआत

 लंबी आयु के लिए बने करती है पूजा

भाई दूज,जिसमें बहनें अपने वीर के माथे पर तिलक कर मृत्यु के देवता यमराज से अपने वीर की लंबी आयु की पूजा करती है। इसी भाव को दर्शाने वाला यह प्यार भरा त्यौहार इस बार 16 नवंबर दिन सोमवार को मनाया जाएगा।

किस महूर्त में कर सकेंगे भाई को तिलक

भाईदूज का पर्व कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। भाई दूज का टीका शुभ मुहूर्त दिन 12:56 से 03:06 तक है।

क्यों करती है बने भाई के लिए यह पूजा

भाई बहन का रिश्ता बहुत अनमोल होता है,जिसमें बहन अपने वीर के लिए हर हर खुशी को छोड़ सकती है और भी बहन के लिए अपनी खुशी भूला सकता है। इसलिए इस रिश्ते को और मजबूत बनाने के लिए भाई दूज की अहमियत दिखती है क्योंकि इस मूत्यु के देवता ने भी अपनी बहन यमी से मिलने के लिए नरक के सभी जीवों को मुक्त कर दिया था। यह भी पढ़ेःतनिष्क क्यों बना सोशल मीडिया ट्रोलर्स के आंखों की किरकिरी

क्यों होती है भाई दूज पर यम – यमी की पूजा

भगवान सूर्य नारायण की पत्नी का नाम छाया था। उनकी कोख से यमराज तथा यमुना का जन्म हुआ था। यमुना यमराज से बड़ा स्नेह करती थी। वह उससे बराबर निवेदन करती कि इष्ट मित्रों सहित उसके घर आकर भोजन करो। अपने कार्य में व्यस्त यमराज बात को टालता रहा। कार्तिक शुक्ला का दिन आया। यमुना ने उस दिन फिर यमराज को भोजन के लिए निमंत्रण देकर, उसे अपने घर आने के लिए वचनबद्ध कर लिया।

यमराज ने सोचा कि मैं तो प्राणों को हरने वाला हूं। मुझे कोई भी अपने घर नहीं बुलाना चाहता। बहन जिस सद्भावना से मुझे बुला रही है, उसका पालन करना मेरा धर्म है। बहन के घर आते समय यमराज ने नरक निवास करने वाले जीवों को मुक्त कर दिया।

यमराज को अपने घर आया देखकर यमुना की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसने स्नान कर पूजन करके व्यंजन परोसकर भोजन कराया। यमुना द्वारा किए गए आतिथ्य से यमराज ने प्रसन्न होकर बहन को वर मांगने का आदेश दिया।

यमुना ने कहा कि भद्र! आप प्रति वर्ष इसी दिन मेरे घर आया करो। मेरी तरह जो बहन इस दिन अपने भाई को आदर सत्कार करके टीका करें, उसे तुम्हारा भय न रहे। यमराज ने तथास्तु कहकर यमुना को अमूल्य वस्त्राभूषण देकर यमलोक की राह की। यह भी पढ़ेः “The Crust” लघुउद्योग की नई और आधुनिक रुपरेखा के साथ एक नई शुरुआत

इसी दिन से पर्व की परम्परा बनी। ऐसी मान्यता है कि जो आतिथ्य स्वीकार करते हैं, उन्हें यम का भय नहीं रहता। इसीलिए भैयादूज को यमराज तथा यमुना का पूजन किया जाता है।

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