जिला न्यायलय की महिला अधिवक्ता के साथ हुआ अभद्र व्यवहार

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न्यूज़ डेस्क, लखनऊ। कानून को लोगों का रक्षक कहा जाता है , परन्तु कानून के रक्षक ही जब एक दूसरे का शोषण करने लग जाएँ तो किस्से रक्षा की दुहाई की जाये। लखनऊ में महिला अधिवक्ताओं की स्थिति बहुत ही दयनीय है। यहाँ के पुरुष अधिवक्ता महिला अधिवक्ता का बुरी तरह से शोषण कर रहे है। मारपीट , गाली देना , जो भी महिला अधिवक्ता उनकी बातों को मानने से इंकार करती है उसका वकालत के पेशे में रहना मुश्किल कर देते हैं।

हाल ही में लखनऊ की एक वरिष्ठ अधिवक्ता का ऐसा ही एक मामला सामने आया है, महिला अधिवक्ता शशि रावत को गुंडों के माध्यम से जान से मारने की धमकी दी तथा कहा कि वो महिलाओं के अधिकार के लिए आवाज़ न उठायें और समझौता कर ले। महिला अधिवक्ता ने जब इन बातों से इंकार किया तो पुरुष अधिवक्ताओं द्वारा ज़बरदस्ती उनके चैम्बर का ताला तोड़ा गया और चैम्बर में पड़ी सभी चीज़ों को तोड़फोड़ कर दिया गया , यहां तक कि सोफे कुर्सी तक चुरा लिए गए।

इस घटना पर अधिवक्ता शशि रावत का कहना है कि ये कैसा समाज है, एक तरफ हम महिला और पुरुष की बराबरी की बातें करते हैं और दूसरी तरफ जब उन्ही महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई लड़ी जाये तो वो आवाज़ उठाने वाली महिला अधिवक्ता के साथ ज़बरदस्ती शोषण करते हैं।

महिला अधिवक्ता ने हमारे संवाददाता को बताया कि मैं तो सिर्फ महिला अधिवक्ता होने के नाते महिलाओं पर होने वाले शोषण के लिए आवाज़ उठा रही हूँ। उन्हें सम्मान मिले इस कोशिश में लगी हूँ। इसके लिए मैंने सम्बंधित अधिकारीयों से बात भी की इसीलिए मुझे गुंडों के माध्यम से धमकी दी गयी। वो लोग नहीं चाहते कि मैं महिलाओं के सम्मान की यह लड़ाई जारी रखूं । इस शोषण के विषय में मैंने कई जगह शिकायत भी दर्ज की परन्तु कहीं से सहायता नहीं मिली।

कहीं से सहायता न मिलने पर निराश होती अधिवक्ता शशि रावत को भारतीय मीडिया फाउंडेशन की प्रदेश अध्यक्ष मेघा तिवारी के रूप में आशा की किरण नज़र आयी। महिला अधिवक्ता ने मेघा तिवारी से फ़ोन पर बात की तथा इस सम्बन्ध में एक पत्र लिख कर पूरी घटना की जानकारी दी। मेघा तिवारी ने कहा वो हर हाल में महिला अधिवक्ता को न्याय दिलवा कर रहेंगी।

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