तनिष्क क्यों बना सोशल मीडिया ट्रोलर्स के आंखों की किरकिरी

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तनिष्क, टाटा समूह का जाना माना ज्वैलरी ब्रांड जिसके गहनों से भारतीय महिलाएं अपने आप को हर त्योहार पर सजाती संवारती है पर आचानक इसके एक विज्ञापन को सोशल मीडिया पर इस कदर ट्रोल किया गया कि तीन दिन के भीतर 25 लाख से ज्यादा लोगों के देखे जाने के बाद कंपनी ने इसे यूट्यूब से डीलीट कर दिया गया.

क्यों किया विज्ञापन को डीलीट

त्यौहारी सीजन के चलते तनिष्क ने अपने प्रमोशन के लिए एक नया विज्ञापन जारी किया था। इसमें दो अलग-अलग समुदायों की शादी (Interfaith Marriage) दिखाई गई थी। इस पर लोगों ने ट्विटर पर तनिष्क को ट्रोल करना शुरू कर दिया। व लव जिहाद से जैसे आरोप लगाने लगे, अपनी छवि को धक्का लगते देख तनिष्क ने इस विज्ञापन को हटा लिया । यह भी पढ़े: यूथ इंडिया डेवलपमेंट बोर्ड का किया गया विस्तार

क्या था विज्ञापन में जो तनिष्क बना निशाना

विज्ञापन में एक हिंदु महिला की गोद भराई की रस्मों को एक मुस्लिम परिवार पूरे रीति- रिवाज़ के साथ मना रहा था, विज्ञापन में गोद भराई वाली लड़की की शादी मुस्लिम परिवार में हुई है। इसमें हिंदू संस्कृति को ध्यान में रखते हुए मुस्लिम परिवार सभी रस्मों रिवाजों को हिंदू धर्म के हिसाब से करता दिखाया गया है। इस विज्ञापन में गर्भवती महिला अपनी सास से पूछती है, मां ये रस्म तो आपके घर में होती भी नहीं है, इस पर उसकी सास जवाब देती है कि बिटिया को खुश रखने की रस्म तो हर घर में होती है न।

तनिष्क ने इस विज्ञापन का नाम एकत्वम रखा जिसका अर्थ है एक साथ, पर सोशल मीडिया पर ट्रोलर्स ने इस एड को लेकर कंपनी के खिलाफ बॉयकॉट तनिष्क ट्वीटर पर ट्रेंड करवाया जिसके कारण तनिष्क को विज्ञापन हटाना पड़।

ट्रोलर्स को चेतन भगत का जवाब

विज्ञापन को लेकर तनिष्क पर उठ रहे सवालों के बीच चेतन भगत ने तनिष्क के लिए ट्वीट करते हुए कहा कि जिसने भी आपको निशाना बनाया है उनके लिए परेशान ना हो वह आपके प्रोडक्ट को एफोर्ड नहीं कर सकते उनकी यह सोच देश की अर्थव्यवस्था को कहा तक ले जाएंगी यह नही पता क्योकि फिलहाल वह काम नहीं कर रहे है|

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कैसे लगी देश की भावना को ठेस

तनिष्क के इस विज्ञापन के बाद यही लगता है कि देश में सौहार्द्रता के बारे में सोचने के लिए काफी सोचाना पड़ेगा क्योंकि लोगों को देश की इतनी फिक्र है कि वह अपने धर्म रुपी चश्में में इतनी बारीकी से देखते है कि क्या गलत है क्या सही, क्या जरुत है आज के समय की यह सब भूलकर एक विज्ञापन से लोगों की भावनाओं को आंकने लगते है.

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